Khel Rap Lyrics – Yashraj from Hindi Rap sung by. Learn, Khel Rap Lyrics – Yashraj meaning in English/Hindi

  • Song: Khel
  • Singer: Yashraj
  • Lyrics: Yashraj
  • Music: Yashraj
  • Cast: Yashraj
  • Lable: Yashraj

Lyrics

Ye zindagi hai khel aake khel mere saath,
Band kamre bhi lagte jail mere saath
Maana 4 din jeene ke toh ye jhelne ki baat,
Warna lagale daav ye hai khelne ki baat,
Ye zindagi hai khel aake
(Yea)

Chaaku ki nok pe,
Tha seekhe kya hota hai chakravyuh kokh mein,
Jaana ki dhoke pe dhoke
Hai mauke pe mauke dene se tu sochle,
Khojle raaz,
Ke karta kyu hai tu ye aatmaghaat,
Ye baat ki.
Rahegi ye maya tu jabtak hai saath,
Aur ki jo gaddari toh lagega paap

Kaun hu mein?
Kya meri galtiyan?
Jab poochhu ye savaal
Log bolte kyu mujhe ‘Takhliya’
Hai chakhliya swaad anusaar sabka
namak ye harami ka
Gumnami ke sheher mein kaha keemat hai
zubaani ka
Jhaanse (Jhansi) mein fasi raani ka,
Bani jo Manikarnika,
hanikarak ye vani ka,
Kami lage jab paanika
Toh pee lo,Tum toh jheel ho
Behna kaam nai hai
Sikhaadi bhai ko jo izzat
Behen nakaam nai hai.

Meine toh bola ye sachmein
Kasmein vaade saare vashmein,
Rehna kyu chaahte ho touch mein,
Jabhi jeene laga mein mere sapne

Meine toh bola ye sachmein
Kasmein vaade saare vashmein,
Rehna kyu chaahte ho touch mein,
Jabhi chhode meine sapne ratne

(Arey putra jis singhaasan pe baithe ho,
Uske neeche toh aag na jalaao,
Ye singhaasan jal jaaega, jal jaaega ye singhaasan)

Ye zindagi hai khel aake khel mere saath,
Band kamre bhi lagte jail mere saath
Maana 4 din jeene ke toh ye jhelne ki baat,
Warna lagale daav ye hai khelne ki baat,
Ye zindagi hai khel aake

(Murkh)

Jaha pe wo baatein kare
Waaha pe hi toh jaanke maarte chhoori,
Kisne kaha sirf ye zindagi dekhi
Unhone jinke sar pe jhoori,
Haan seekha majboori mein gaayab
Jo bhi saare karte the meri badhai,
Ab haathon ki kalam banjaati trishul,
Aur beat pe naachu, ab honi tabaahi,

Neel kanth kare
sabka ant,
Jabhi raste band
Tabhi soch anant,
Jabhi likhta seekhta,
Dikhta cheekhta
Baje yaha mrindagam,
Mein bolu tere gaanon mein kitna
Rhythm kam,
Jabhi tu kholta fann,
Mein karunga khud dafan,
Lage jo manghadant
Wo toh hai kadva sach,
Khula manch,
Ye na nashevaali baatein thoda kum toh baje,
Par
Ye vaani toh jaanle,
Likhta mein jaise pichaanve,
Agar hai aana pehchaan mein,
Pehle tu jaake banana pehchaan be,
Meri ye baatein ko maanle,
Baaton ko mann mein thaanle,
Mere ek kandhe pe baitha hai sant,
Aur dusre pe baitha shaitaan hai.

ये ज़िन्दगी है खेल आके खेल मेरे साथ
बंद कमरे भी लगते जेल मेरे साथ
माना 4 दिन जीने के तोह ये झेलने की बात
वर्ण लागले डाव ये है खेलने की बात
ये ज़िन्दगी है खेल आके
(या )

चाक़ू की नोक पे
था सीखे क्या होता है चक्रव्यूह कोख में
जाना की धोके पे धोके
है मौके पे मौके देने से तू सोचले
खोजले राज़
के करता क्यों है तू ये आत्मघात
ये बात की .
रहेगी ये माया तू जबतक है साथ
और की जो गद्दारी तोह लगेगा पाप

कौन हु में ?
क्या मेरी गलतियां ?
जब पूछू ये सवाल
लोग बोलते क्यों मुझे ‘तखलिया ’
है चिखलिया स्वाद अनुसार सबका
नमक ये हरामी का
गुमनामी क e शहर में कहा कीमत है
ज़ुबानी का
झांसे (झाँसी ) में फांसी रानी का
बानी जो मणिकर्णिका ,
हानिकारक ये वाणी का
कमी लगे जब पानीका
तोह पी लो ,तुम तोह झील हो
बहना काम नै है
सिखादि भाई को जो इज़्ज़त
बेहेन नाकाम नै है .

में तोह बोलै ये सचमें
कसमें वाडे सारे वशमें
रहना क्यों चाहते हो टच में
जभी जीने लगा में मेरे सपने

मैंने तोह बोलै ये सचमें
कसमें वाडे सारे वशमें
रहना क्यों चाहते हो टच में
जभी छोड़े मैंने सपने रटने

(अरे पुत्र जिस सिंघासन पे बैठे हो
उसके नीचे तोह आग न जलाओ
ये सिंघासन जल जाएगा , जल जाएगा ये सिंघासन )

ये ज़िन्दगी है खेल आके खेल मेरे साथ
बंद कमरे भी लगते जेल मेरे साथ
माना 4 दीन जीने के तोह ये झेलने की बात
वर्ण लागले डाव ये है खेलने की बात
ये ज़िन्दगी है खेल आके

(मुर्ख )

जहा पे वो बातें करे
वाह पे ही तोह जानके मारते छूरी
किसने कहा सिर्फ ये ज़िन्दगी देखि
उन्होंने जिनके सर्प झूरी
हाँ सीखा मजबूरी में गायब
जो भी सारे करते थे मेर बधाई
अब हाथों की कलम बनजाति त्रिशूल
और बीट पे नाचू , अब होनी तबाही

नील कंठ करे
सबका अंत
जभी रस्ते बंद
तभी सोच अनंत
जभी लिखता सीखता
दीखता चीखता
बजे यहाँ मृंदगम
में बोलू तेरे गानों में कितना
रदम काम
जभी तू खोलता फानन
में करूँगा खुद दफ़न
लगे जो मनघडंत
वो तोह है कड़वा सच
खुला मंच
ये न नशेवाली बातें थोड़ा कम तोह बजे
पर
ये वाणी तोह जानले
लिखता में जैसे पिचानवे
अगर है आना पहचान में
पहले तू जाके बनाना पहचान बे
मेरी ये बातें को मानले
बातों को मैं में थानले
मेरे एक कंधे पे बैठा है संत
और दूसरे पे बैठा शैतान है .

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